साहसी – कर्नल नरेंद्र “बुल” कुमार

आज एक ऐसे महानायक की पुण्यतिथि है, जिनके शौर्य और साहस की वजह से भारत ने सियाचिन में एक बड़ी जीत हासिल की इनका नाम है कर्नल नरेंद्र “बुल” कुमार। वर्ष 2020 में आज ही के दिन 87 वर्षीय कर्नल बुल कुमार साहब ने बैकुंठ की ओर प्रस्थान किया था। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे इनकी चरण वंदना करने का अवसर प्राप्त हुआ है। कर्नल नरेंद्र “बुल” कुमार 1965 में भारत के प्रथम विजेता एवेरेस्ट दल के डिप्टी लीडर थे। इसके अलावा कर्नल साहब ने कई सारी चोटियाँ फतेह की हैं, जिसमें भारत की सबसे ऊंची व विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी “कंचनजंगा” भी शामिल है। ये एक मात्र ऐसे अधिकारी रहे हैं, जिन्हें कर्नल रैंक में परम वशिष्ठ सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा इन्हें कीर्ति चक्र, पदम श्री, अति वशिष्ठ सेवा मैडल व अर्जुन पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है। इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही कि इन्होंने सियाचिन का बड़ा भाग पाकिस्तान के हाथ जाने से रोक दिया। आज सियाचिन का बड़ा भू भाग हमारे पास केवल और केवल कर्नल कुमार की बदौलत ही है। मैंने जब इनको अपनी पुस्तक भेंट की तो इन्होंने भी तुरंत मुझे अपने कंचनजंगा की फतेह की कहानी बताती अपनी पुस्तक भेंट में दी, जो मेरे लिए अनमोल है। सेना के इस वीर और भारत माता के पुत्र को शत शत नमन। जय हिंद। जय हिंद।

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