आज समय है याद करने का एक ऐसे शूरवीर को जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन से लोहा लिया और उनके छक्के छुड़ा दिए और रण भूमि में ही भारत माता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया, जी हां इस रणबाँकुरे का नाम है, लेफ्टिनेंट कर्नल ऐ बी तारापोर ।
इस असाधारण वीरता के प्रदर्शन के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
तारापोर का जन्म 18 अगस्त, 1923 को बंबई में हुआ । 17 पुणे हार्स के तारापोर को 11 सितंबर, 1965 को फिल्लौरा पर कब्ज़ा करने का आदेश मिला ।
पाकिस्तान के सियालकोट क्षेत्र के फिल्लौरा में छविंद के युद्ध मे अपने सेंचूरियन टैंक पर सवार होकर उन्होंने दुश्मन का सामना बड़ी वीरता से किया । अपने ज़ख्मो की परवाह न करते हुए 14 सितंबर को जब तक कि भारत ने विजय प्राप्त नही कर ली, तब तक तारापोर लड़ते रहे और अंत में उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया I उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाज़ा गया। उन्होंने और उनके दल ने पाकिस्तान के कुल 60 टैंक मिट्टी में मिला दिए ।
तारापोर 42 वर्ष की आयु में ‘परमवीर चक्र’ पाने वाले सबसे वरिष्ठ थे ।
ऋणी राष्ट्र की ओर से इस शूरवीर को शत शत नमन।