निर्मल जीत सिंह जी को जन्म जयंती पर ऋणी राष्ट्र की ओर से शत शत नमन!

आज समय है फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों को नमन करने का। आज उनकी जन्मजयंती है।

सेखों साहब का जन्म 17 जुलाई 1945 को पंजाब के लुधियाना में हुआ.। इनके पिता जी भी भारतीय वायु सेना में कार्यरत थे। बचपन से ही इनका जहाज़ उड़ाने का सपना था। यही सपना इनका जूनून बना और ये वायु सेना में फाइटर पायलट बन गए.। वर्ष 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी तैनाती श्रीनगर एयर बेस पर थी। पाकिस्तान यहाँ हमला करने के नापाक मंसूबे बना चुका था। पाकिस्तान ने प्लान बनाया की पुंछ के पहाड़ों तक वो लो फ्लाइंग करेंगे और पुंछ से एक दम 16000 फीट पर अपने लड़ाकू जहाजों को उठा लेंगे

उनको पता था पुंछ के बाद ही वो भारतीय वायु सेना के राडार द्वारा दिखाई दी सकते हैं लेकिन तब तक भारतीय वायु सेना को सँभालने का समय नहीं मिलेगा क्योंकि पुंछ से श्रीनगर की हवाई दूरी केवल 6 मिनट की थी। इसी प्लान के साथ उन्होंने 14 दिसंबर 1971 को श्रीनगर एयर बेस पर हमला बोल दिया. भारत के लिए करो या मरो की स्तिथि आ गयी क्योंकि श्रीनगर एयर बेस को हर हाल में बचाना जरूरी था.

गोलाबारी के बीच एक नौजवान सिख किसी तरह बचते बचाते अपने विमान तक आया और उड़ान भरते ही पाकिस्तानी विमानों को निशाना बनाने लगा देखते ही देखते दुश्मन के खेमे में हलचल मच गयी उनका इस बात का इल्म नहीं था की ऐसा भी हो सकता है। सेखों ने दुश्मन के दो विमानों को तहस नहस कर दिया पर उनकी संख्या ज्यादा थी. सेखों के विमान में आग लग गयी और जब वो पैराशुट से कूदे तो बच नहीं पाए और शहीद हो गए. उनको मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाज़ा गया.

दिल्ली के एयर फ़ोर्स म्यूजियम में उनकी प्रतिमा लगी हुई है और यहां उनका विमान भी रखा गया है. लुधियाना शहर में भी उनकी प्रतिमा लगी हुई है.

वायु सेना को आज तक केवल एक बार ही परमवीर चक्र मिला है और वो मिला है शूरवीर निर्मल जीत सिंह सेखों को.

ऋणी राष्ट्र की ओर से इस शूरवीर को शत शत नमन। जय हिन्द।

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