नमस्कार दोस्तों,
आज के दिन का भारत के इतिहास में बहुत महत्वपुर्ण स्थान है क्योंकि आज ही के दिन यानि कि 10 सितंबर वर्ष 1965 को पंजाब के खेमकरण सेक्टर में असल उत्तर इलाके में कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद ने पाकिस्तान के 7 पैटन टैंकों को नेस्तोनाबूत कर दिया। जीप पर आर सी एल गन से दुश्मन को इतनी भारी क्षति युद्ध इतिहास में पहली बार पहुंच रही थी और फिर लड़ते लड़ते अन्तः अब्दुल हमीद सर्वोच्च बलिदान दे कर सदा सदा के लिए अमर हो गए। इस वीरता के लिए उनको परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
उनके बारे में आप सभी को एक रोचक तथ्य से अवगत करवाता हूँ वो ये की सेना में शामिल होने से पहले वो अपने गाँव में दर्जी की दुकान चलाते थे, लेकिन देश सेवा का जज़्बा इतना प्रबल था कि वो सेना में चले ही गए।
इससे हमें ये प्रेरणा मिलती है कि दिल में अगर देश के लिए कुछ करने का जज़्बा हो तो कोई भी बाधा हमारी राह नही रोक सकती। पिछले वर्ष मुझे असल उत्तर इलाके में उसी स्थान पर जाने का सौभाग्य मिला जहां उनको शहादत प्राप्त हुई थी आज वहां उनकी मज़ार है और स्मारक है जो आज भी देश वासियों को देशभक्ति का संदेश दे रहा है।
शहीदों की चिंताओं पे लगेंगे हर बरस मेले
वतन पे मरने वालों का बाकी यही निशां होगा
अब्दुल हमीद की शहादत के इस मौके पर उनको ऋणी देशवासियों की ओर से शत शत वंदन। जय हिंद।
स्रोत : देशभक्ति के पावन तीर्थ
प्रभात प्रकाशन, ISBN 9789386231062