फील्ड मार्शल की जयंती पर उनको ऋणी राष्ट्र की ओर से शत शत नमन।

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आज समय है एक शूरवीर को नमन करने का जिसने अपने पराक्रम और युद्ध कौशल के दम पर भारत को पाकिस्तान के साथ हुए 1971 के युद्ध में विजय दिलवाई। आज फील्ड मार्शल सैम मानेकशा की जयंती पर उनको शत शत नमन।

आज भारत के प्रथम फील्ड मार्शल और दूसरे विश्व युद्ध में उस समय के सर्वोच्च सैनिक सम्मान विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित एक ऐसे नायक की जयंती है, जिन्होंने अपनी सूझबूझ से 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध का नक्शा ही बदल दिया था. इस शूरवीर का नाम था सैम मानेकशा जिन्हें प्यार से सैम बहादुर भी बुलाते थे.

सैम का पूरा नाम ‘सैम होरमसजी फरामजी जमशेदजी मानेकशॉ’ था. उनका जन्म आज ही के दिन यानि कि 3 अप्रैल, 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में हुआ. उनके पिता पेशे से एक डॉक्टर थे और वर्ष 1900 में अमृतसर में आकर बस गए. उनके सभी बच्चे यानि कि सैम और उनके भाई-बहन धारा प्रवाह अंग्रेज़ी, हिंदी, गुजराती और पंजाबी बोल सकते थे.

सन् 1969 में सफलता की सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते सैम को भारतीय सेना का प्रमुख बना दिया . 1971 का युद्ध जीतने के बाद सैम को ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया और 1973 में भारत के पहले फील्ड मार्शल बनने का गौरव प्राप्त हुआ । इसके अलावा उनको कई सारे अन्य सैन्य पुरस्कार भी दिये गए । सैम ने अपने जीवन के आखिरी वर्ष नीलगिरी की पहाड़ियों में बसे कुनूर में बिताए । वेलिंगडन में कमांडेंट के पद पर उन्होने कई वर्षों तक काम किया और शायद इसीलिए नीलगिरी की पहाड़ियों से उनको प्रेम हो गया था । 27 जून, 2007 को 94 वर्ष की आयु में सैम हम सब को अलविदा कहकर दुनिया से चले गए ।

सैम उनकी विशाल प्रतिमा सैनिक कॉलेज, वेलिंगडनके प्रवेश द्वार पर लगी हुई है । जनवरी 2016 में मुझे यहाँ सैम की प्रतिमा के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।इस महान नायक की जयंती पर उनको ऋणी राष्ट्र की ओर से शत शत नमन।

जय हिंद।

संस्मरण आभार
देशभक्ति के पावन तीर्थ
प्रभात प्रकाशन
लेखक ऋषि राज

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